Bichhu mere naina, badi zehereeli aankh maare
Kamsin kamariya saali ik thumke se lakh maare
गीत के प्रारंभ में सुंदरी अहिंसक तरीक़े से लोगों को मारने की अपनी क्षमता पर प्रकाश डालती है. उसकी आँख की उपमा बिच्छू से दी गई है और ठुमके में गुरु गोविन्द सिंह के आह्वान को लगभग पूरा करने की कोशिश की गई है ...
Note hazaaro'n ke, khulla chhutta karaane aayi
Husn ki teelli se beedi-chillam jalaane aayi
तदुपरांत अपने पास हज़ारों के नोट होने के बावजूद छुट्टे और बीड़ी-चिलम में दिलचस्पी रखने वाली इस सुंदरी का rooted to the soil चरित्र उभर कर आता है ...
Aaayi ! chikni chameli chhup ke akeli pawwa (quarter) chadha ke aayi
स्वयं को चिकनी चमेली से ता'आर्रुफ़ कराने वाली यह सुंदरी मदिरापान छुप के करती है ... यह भारतीय समाज में स्त्रियों के मदिरापान को हेय दृष्टि से देखने की वजह से उनकी छुप के मदिरापान करने की विवशता को भी दर्शाता है ... ये भी मुमकिन है कि ये सुंदरी अपनी मदिरा को किसी और के साथ बांटना नहीं चाहती ... बहरहाल ... इस दौर में जब भारतीय क्रिकेटरों को चिकने हाथों (butter fingered) वाला कहा जाता है , इस सुंदरी के आपादमस्तक (नख-शिख) चिकने होने में भी अमूल मक्खन का योगदान होने की सम्भावना से इनकार नहीं कर सकते ... इसका एक तात्पर्य ये भी है कि सुंदरी ने मदिरापान कर के अपनी मादकता बढ़ाने का प्रयास किया है... वस्तुतः उसे इसकी ज़रुरत नहीं होनी चाहिए ... अगर ऐसा है तो यह उसके आत्मविश्वास की कमी दर्शाता है... गौरतलब है कि अपने पूर्व (शीला ) अवतार में ये सुंदरी आत्ममुग्धता की शिकार थी... ख़ैर आगे चलते हैं ...
Jungle mein aaj mangal karungi main
Bhookhe sheron se khelungi main
Makkhan jaisi hatheli pe jalte angaare le lungi main
Haaye! gehre paani ki machhli hoon Raja
Ghaat Ghaat dariya mein ghoomi hoon main
Teri nazro ki leharo'n se haar ke aaj doobi hoon main
Hoye jaanleva jalwa hai
Dekhne mein halwa hai
Jaanleva jalwa hai
Dekhne mein halwa hai
Pyaar se paros doongi toot le zaraa
Yeh toh trailer hai poori fillam dikhane aayi
जंगल में मंगल करना और भूखे शेरों से खेलने की बात सुंदरी के playful चरित्र पर प्रकाश डालता है... 'जानलेवा जलवा' और 'देखने में हलवा' काफ़िये का अच्छा ख़याल रखते हुए सुंदरी पूरी चलचित्र दिखने का वादा भी करती है... यह हमारे कुछ सिनेमा-प्रेमी दोस्तों के लिए खुशख़बरी है...
Banjar basti mein aayi hai masti
Aisa namkeen chehra tera
Meri neeyat pe chadhke chhoote na hai rang gehra tera
Joban ye mera kenchi hai raja
Saare pardo ko kaatungi main
Shaame meri akeli hai aaja sang tere baatungi main
Haaye! baaton mein ishaara hai
Jisme khel saara hai
Baaton mein ishaara hai
Jisme khel saara hai
Tod ke tijoriyon ko loot le zara
Choom ke zakhmo pe thoda malham lagaane aayi
अपने चेहरे के नमक से बंजर बस्ती में मस्ती लाने का दावा करने वाली ये सुंदरी आशंकित है कि इसकी नीयत पे चढ़ने वाले का गहरा रंग इस पर न गिर/टूट/चढ़ जाए ... कैंची जसी जोबन (यौवन का तद्भव ) से तमाम पर्दों को काटने की क्षमता रखने वाली यह युवती यक़ीनन बहुत प्रतिशील विचारधारा का अनुसरण करती है जिसमें पर्दा और हिजाब का विरोध करना सर्वथा उचित है ...अगले वाक्य में अपनी अकेली शाम की बात से उसने 'भरे शहरों में तन्हाई बहुत है' की पुष्टी की है ... शामों को बांटने की बात कर के सुंदरी ने pare & share की अपनी मंशा ज़ाहिर की है... इशारे से सुंदरी तिजोरियों को तोड़ने और लूटने की लोगों की इच्छा बढ़ाती है ... ऐसी सुंदरियों के आग्रह से हमारे समाज में क़ानून-व्यवस्था के लिए संकट उत्पन्न हो गया है ... फिर चूम कर ज़ख्मों पर मलहम लगाने की बात करती है... इसके दो तात्पर्य हैं ... १. ये हमारे समाज में hygiene की उपेक्षा करने की प्रवृत्ति दर्शाता है...२. उपचार की ये विधि अगर सफल होती है तो ये हमारे देश के pharmaceutical उद्योग के लिए भारी खतरा साबित हो सकती है .
Aaayi ! chikni chameli chhup ke akeli pawwa chadha ke aayi....
अंततः सुंदरी ख़ुद के चिकने होने और पौव्वा के सहारे मादकता अधिकाय की स्थिति की पुनारोक्ति करती है ...